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छत्तीसगढ़ सांख्यिकी

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स्थानीय निकाय



परिचय:-

राष्ट्रीय लेखा प्रणाली के अनुसार कुल अर्थव्यवथा को पांच संस्थागत क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। जैसे -सामान्य सरकारी क्षेत्र, वित्तीय कॉरपोरेट क्षेत्र, गैर वित्तीय कॉरपोरेट क्षेत्र, गैर लाभ संस्थान परिवारों की सेवा एवं घरेलू क्षेत्र। भारत में राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी का संकलन आर्थिक समूह तीन क्षेत्रों से की जाती है यथा (1) सार्वजनिक क्षेत्र (2) निजी क्षेत्र (3) घरेलू क्षेत्र। स्थानीय निकाय सामान्य सरकारी क्षेत्र का एक भाग है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के अन्तर्गत आता है

स्थानीय निकाय:-

छत्तीसगढ़ राज्य में (वर्ष 2014-2015 की स्थिति में) कुल स्थानीय निकाय 11254 है। स्थानीय निकाय प्रमुखतः दो प्रकार के होते है- (1) ग्रामीण निकाय (2) नगरीय निकाय। ग्रामीण निकाय में क्रमशः जिला पंचायत, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत शामिल होते हैं। इसी प्रकार नगरीय निकाय में नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत होते हैं।

स्थानीय निकाय के लेखों का का महत्व :-

योजनाओं का विकेन्द्रीकरण एवं आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में स्थानीय निकायों के खातों की आर्थिक एवं उद्देश्यवार वर्गीकरण की मांग काफी है। यह वर्गीकरण उनके धन के स्रोत एवं उनके उपयोग का व्योरा देता है। यह वर्गीकरण केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय नई दिल्ली के दिशा निर्देशानुसार किया जाता है। तत्पश्चात निर्धारित खातों का निर्माण होता है जैसे- (1) Borrowing Account (2) Capital Finance Account (3) Capital Formation By type of Assets (4) Estimates of net Product ¼5½ Income Outlay Account जिसका उपयोग राष्ट्रीय एवं राज्यीय आय के अनुमान तैयार करने में उपयोग किया जाता है।

स्थानीय निकायों की कवरेज:-

छत्तीसगढ़ राज्य में सम्पूर्ण नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, एवं जनपद पंचायतों को कवर किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों की संख्या अधिक होने के फलस्वरूप सिस्टमेटिक रेन्डमली चयन कर प्रत्येक जनपद पंचायत से 12 ग्राम पंचायत को चयन कर आंकड़ो को संकलन किया जाता है।